Motivational quotes
Heart Touching
- अपनो ने दिया है धोखा
- गैरो से शिकायत क्या??
- जब दोस्त👬ने ख़ंजर मारा🔪 दुश्मन कि जरूरत क्या !!
- _ ख्वाब ऊँचे होने चाहिए,
- फ़िर चाहे.....
- परिस्थितियां कैसी भी हो
- यूँ तो ऐ ज़िंदगी तेरे सफर से शिकायतें बहुत थी,
- मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारें बहुत थी…!
- : निरंतर वृक्षपोषण।
- #बड़ा_हुआ_तो_क्या_हुआ_जैसे_पेड़_खजूर।
- #पंछी_को_छाया_नहीं_फल_लागे_अति_दूर।।
- आज हम लोगों पर उपरोक्त पंक्ति बिल्कुल चरितार्थ हो रही है।हम लोग शायद उम्र के साथ तो बढ़े किन्तु अपने या अपनो के लिए क्या किया? यह विचार करना आवश्यक है। हमने अपनी धरती माँ को दूषित ही किया है। पर कभी उस ममतामयी भूदेवी के सुख के लिये हृदय में विचार तक नहीं आया। शायद कभी सोचा होता तो आज लगता कि हमने जन्म लेकर कुछ अपने-अपनो के लिए किया।
- ऐसा कौन -सा कार्य हैं ? जो करुणा-मयी माँ वसुंधरा के साथ कुछ करने का एहसास कराए! लगे कि, हमने कुछ किया! #ऐसा कार्य है अपनी धरती माँ की सेवा करना! यह सेवा कई तरह से की जा सकती है। 1- स्वच्छता करके । 2-वृक्षारोपण करके। 3 जल शोधन करके आदि।
- अब विचार यह आता है कि ये कार्य हम एक साथ कैसे कर सकते हैं ? इसके लिए हमें चलना होगा यमुना तटपर (मथुरा) । यहां यह सब एकसाथ #यमुना_मिशन द्वारा किया जा रहा है।
- #आओ_जीवन_में_कुछ_करके_जाऐं।
- #वसुन्धरा_का_कर्ज_चुकाऐं,
- #मानव_होकर_मानवता_फर्ज_निभाऐं
- #वृक्ष_लगाऐं_वृक्ष लगाऐं_वृक्ष_लगाऐं
- : मुझसे दोस्त नहीं बदले जाते,चाहे लाख दूरी होने पर,
- लोगों के भगवान बदल जाते हैं,एक मुराद ना पूरी होने पर...!
- मैने कहा उपरवाले से,क्या खूब दोस्त मिले है...
- क्या खूब मैनें, किस्मत पाई है,
- उपरवाले ने कहा हंसकर,संभाल कर रख पगले,
- ये मेरी पसंद है जो तेरे हिस्से में आई है...!!
- : अंजाम चाहे जो भी हो ,,,,,,
- पर खेल तो अब बड़ा ही खेलेंगे ।।
- *"कोई मुझ से पूछ बैठा,*
- *'बदलना' किस को कहते हैं..?
- *सोच में पड़ गया हूँ मिसाल किस की दूँ..?
- *"मौसम" की या "अपनों" की"..!!!*
- बचपन से ही सोचा था,बड़ा हो कर,
- कुछ करूँगा,कुछ बनूँगा,चाहत तो बहुत थी,
- क्या है ज़िन्दगी, ना जाने क्या हो गया,
- बनना चाहा बरगद,एक गमले का हो गया,
- छांव चाह कर भी ना दे सका किसी को,
- तो क्या हो गया,छोटे पौधे में फूल लगा,
- घर के एक कोने को तो महका ही गया,
- अगर ना बरगद,ना गमले का पौधा बनता,
- घास का तिनका ही बनता तो भी ग़म न होता,
- किसी ग़रीब के थक के सोने की सेज होता,
- मन का वहम निकालो,जैसी मिले ज़िन्दगी,
- उसे चुटकी में यूँ अपना लो,पेड़,पौधा,तिनका,
- मन और चाह सही है,तो सारे रूप अपने हैं,
- वरना कितने ही जतन कर ले,ये दूर के सपने हैं
- बचपन से ही सोचा था,बड़ा हो कर,
- कुछ करूँगा ही नहीं कुछ बड़ा बनूँगा ।
- : दुनियां में कौन है, तेरा मुसाफ़िर मन,
- दुनियां के रेन बसेरे में काटने कुछ दिन,
- दुनियां से कुछ इल्म हासिल तो कर लिया,
- कि सर झुकाकर पत्थर दिलों को पूजतें चलो..
- सर झुकाते चलते जायेंगे, पत्थरें दिलों को,
- इतना भी नहीं चाहेंगे, कि वो बे-वफ़ा हो जायें,
- दुआयें दी है, कि सदा उन्हें तख्तो-ताज मिले,
- यह हमारी फिद्रत है,हमारी कमजोरी न समझना..
- : हम बुरे नहीं थें
- मगर तुमनें बुरा कह दिया
- पर अब हम बुरे बन गए हैं
- ताकि तुम्हें कोई झूठा ना कहदे
- प्यार या प्रेम हमेशा अधूरा ही होता है, अधूरा ही अच्छा लगता है और उसे अधूरा ही रहना चाहिये. अगर ये पूरा हो गया तो उसका मतलब होगा कि वो अपनी सीमा तक पहुँच गया है. और उसकी सीमाऐ पता हैं तो फ़िर और ज़्यादा प्यार कैसे कर पायेंगे अपने प्रिय को.
- अगर प्यार को असीम रखना चाहते हैं लगातार रखना चाहते हैं तो उसे अधूरा ही रहना होगा. ताकि और ज़्यादा प्यार करने की चाहत बनी रहे. और ज़रूरी नहीं कि ये प्रिय सिर्फ प्रेयसी या प्रेमी ही हो ये कोई भी हो सकता है जो आपका प्रिय हो, आपके परिजन या मित्र. कोई भी आपसे जुड़ा हुआ.....
- जब आप इस तरह से सोचेंगे तो दुनिया बहुत प्यारी लगेगी. बुद्धिमान और सकारात्मक सोच का व्यक्ति क्रिमनल व्यक्ति में भी अच्छाई ढूँढ़ निकालता है जबकि नकारात्मक सोच के व्यक्ति को अच्छे व्यक्ति में भी बुराइंया नज़र आयेंगी।
- लोग बुरे नहीं होते....
- बस जब आपके मतलब के नहीं होते...
- तो बुरे लगने लगते है...।।
- समझनी है जिंदगी तो पीछे देखो
- जीनी है जिंदगी को तो आगे देखो
- हम भी वहीं होते है
- रिश्ते भी वहीं होते हैं
- और रास्ते भी वहीं होते हैं
- बदलता है तो बस.....
- समय,एहसास और नजरिया...।।
- **जिसने दी है जिंदगी उसका*
- *साया भी नज़र नहीं आता*
- *🍀यूँ तो भर जाती है झोलियाँ*
- *मगर देने वाला नज़र नही आता..*
- *उनकी ‘परवाह’ मत करो,*
- *जिनका ‘विश्वास’ “वक्त” के साथ बदल जाये..*
- *👍‘परवाह’ सदा ‘उनकी’ करो;*
- *जिनका ‘विश्वास’ आप पर “तब भी” रहे’*
- *जब आप का “वक्त बदल” जाये..*
- " लब्ज़ ही ऐसी चीज़ है
- जिसकी वजह से इंसान
- या तो दिल में उतर जाता है
- या दिल से उतर जाता है "
- ज़िन्दगी के इस कश्मकश मैं
- वैसे तो मैं भी काफ़ी बिजी हुँ ,
- लेकिन वक़्त का बहाना बना कर ,
- अपनों को भूल जाना मुझे आज भी नहीं आता !
- जहाँ यार याद न आए वो तन्हाई किस काम की,
- बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की,
- बेशक अपनी मंज़िल तक जाना है ,
- पर जहाँ से अपने ना दिखे
- वो ऊंचाई किस काम की .
- ये कश्मकश है जिंदगी की कैसे बसर करें ,,ख्वाहिशें दफ़न करे कि चादर बड़ी करें।।।
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